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गोचर का कुंडली पर प्रभाव

जय श्री राम। आज चर्चा करते हैं गोचर की। भगवान शिव जी ने सारे देवताओं को बोला जो ब्रह्मांड की सबसे तेज परिक्रमा करेगा वो धरती का श्रेष्ठ देवता माना जाएगा। सब लोग अपने - अपने वाहन से परिक्रमा करने निकल गए। गणेश जी ने भगवान शिव की तीन बार परिक्रमा कर दी और धरती का सबसे श्रेष्ठ देवता बन गए। अगर क्षण भर में किसी को अपना समय पता करना है कि मेरा समय कैसा चल रहा है तो वह गोचर से क्षण भर में पता लग जाता है। दशाओं से आप निर्णय नहीं कर पाते। दशा अच्छी है तो अंतरर्दशा खराब है। अंतरर्दशा अच्छी है तो प्रत्यंतर दशा खराब है। प्रत्यंतर दशा अच्छी है तो सूक्ष्म दशा खराब है। सूक्ष्म दशा अच्छी है तो प्राण दशा खराब है। डिसाइड नहीं हो पाता। अगर किसी कुंडली में शुक्र की महादशा है। शुक्र कुंडली में अच्छा है। राजयोग देने वाला है। नवमाशा में शुक्र खराब हो गया। निर्णय नहीं हो पाता। नवमाशा में ठीक है। दशमाश कुंडली में खराब हो गया। दशमाश में अच्छा है। डी 20 में खराब हो गया। डी30 में खराब हो गया। डी6 में खराब हो गया। तो ज्योतिष में योग बनते हैं दो तरीके से तो कटते हैं 10 तरीके से। दशाओं से आप डंके की चोट पर कोई भविष्यवाणी नहीं कर सकते। अभी जैसे वर्तमान में कुंभ राशि के ऊपर सारे ग्रह खराब स्थिति में चल रहे थे। राशि का राहु बड़ा खराब होता है। राशि का मंगल खराब होता है। राशि का सूरज, राहु सूर्य ग्रहण बनाता है। और राशि के ऊपर बुध वक्री चल रहा था। वह 2 महीना पांच दिन के लिए बहुत खराब समय था। मैंने बोला था कि कुंभ राशि वालों का समय 5 फरवरी से लेकर 10 अप्रैल तक बहुत खराब है। अब मेरे पास कुंभ राशि वालों के फोन आ रहे हैं। बार-बार कह रहे हैं कि अब थोड़ी राहत मिलनी चालू हो चुकी है। ठीक उसी तरह से मीन राशि के ऊपर सूरज शनि की लड़ाई चल रही है। मंगल शनि की लड़ाई चल रही है। बुध 10 तारीख को आने वाला है। राशि का बुध खराब होता है। लेकिन एक अच्छी बात है कि बुध इस मीन राशि के ऊपर मात्र 20 दिन में राशि चलेगा इसलिए असर नहीं आएगा। मंगल शनि का टकराव चल रहा है। उतना बुरा नहीं है जितना मंगल राहु का टकराव था, सूरज राहु का टकराव था। ग्रहण लगे थे कुंभ राशि के ऊपर। तो अब मीन राशि वाली थोड़ी परेशान राशि में चल रही हैं। गोचर से आपकी राशियों के द्वारा यह पता लग जाता है कि आपकी समय कैसा चल रहा है। अगर कुंडली में राजयोग है और गोचर बहुत बलवान है तो वह राजयोग फलीभूत होता है। कुंडली में राजयोग नहीं है और गोचर बलवान होता है तो कुछ क्षण के लिए राजयोग प्रकट हो जाता है। जैसे मंगल किसी का आठ पॉइंट ले चले उच्च का हो या अपने घर का हो या राशि से 3, 6, 10, 11, में मंगल चल रहा हो तो डेढ़ महीना के लिए व्यक्ति बड़ी अच्छी स्थिति में आ जाता है राजा बन जाता है उसी तरह से शनि अगर राशि से तीसरा छठा 11वां हो और पॉइंट उसको अष्टक वर्ग में अच्छे मिले हो पांच पॉइंट 6 पॉइंट सात पॉइंट मिले हो तो उसका ढाई 3 साल बहुत अच्छा जाता है मगर कुंडली कमजोर हो और दशाएं कमजोर हो तो जब वो गोचर वहां से कमजोर होता है तो फिर उसको परेशानी बढ़ जाती है। हम आगे और ऐसी-ऐसी जानकारियों पर चर्चा करते रहेंगे, आप ऐसे ही हमारे साथ जुड़े रहिए। जय श्री राम। हर हर महादेव।

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4/14/20261 min read

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